Original scale: D#mCurrent scale: D#m
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इन भाषाओं में देखिए:

ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा

चाँद सूरज की परस्तिश, हम नहीं करते
दुनिया के माबूदों1 के आगे नहीं झुकते
क्योंकि ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा
ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा

तेरे ग़म को बढ़ा देंगे, वो तुझे न शिफ़ा देंगे
जो हुए मिट्टी के ढेर, वो किसी को क्या देंगे
इस लिए दर2 ग़ैरों के, हम नहीं जाते
क्योंकि ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा...

होंठ हैं बोल सकते नहीं
आँखें हैं देख सकते नहीं
इन बुतों3 से क्या हासिल
हाथ हैं छू सकते नहीं
ऐसे ख़ुदाओं पर ईमाँ, हम नहीं रखते
क्योंकि ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा...

जब सिताइश होती है, रूह की बारिश होती है
येसू तेरी हुज़ूरी में, रूह की जुंबिश4 होती है
तेरी क़ुव्वत से ख़ाली, हम नहीं रहते
क्योंकि ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा...

ख़ुशख़बरी फैलाएँगे
रूह में बढ़ते जाएँगे
खोए सब इंसानों को, पास येसू के लाएँगे
शैतानों के तूफ़ानों से, हम नहीं डरते
क्योंकि ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा...

जब तेरी रहमत होती है
नाकाम मुक़ाम5 मिल जाते हैं
येसू तेरी रहमत से, दुआ क़बूल हो जाती है
तेरे मजमे6 से ख़ाली हम नहीं जाते
क्योंकि ज़िन्दा ख़ुदा है हमारा...
  1. मा’बूद : देवी देवता, भगवान, सन्सारिक देवता ↩︎
  2. दर : द्वार, फाटक, दरवाज़ा
    दर (रूपक): उपस्थिति, दरबार, शरण, आश्रय-स्थान ↩︎
  3. बुत : मूर्ति, भगवान, प्रतिमा, सन्सारिक देवता ↩︎
  4. जुन्बिश/जुंबिश : जागृति, हलचल, उभार ↩︎
  5. मुक़ाम : स्थान, पद, दर्जा, प्रतिष्ठा, स्थिति ↩︎
  6. मज्मा’ : सभा, जमा’अत, मण्डली ↩︎

कवि और संगीतकार: कलीम इम्मानुएल