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एलिय्याह के ख़ुदा

एलिय्याह के ख़ुदा, एलीशा के ख़ुदा  
अपनी मण्डली में आ, आके आग बरसा  

पेन्तेकोस्त1 के दिन की मानिंद, आग की जीभें बरसा दे  
हर इक जन के ऊपर ये ठहरे, तख़्त शैतानी उल्टा दे  
तू ही जीवन, तू सच्चाई और तू ही राह  
अपनी मण्डली में आ...

तेरी सयानापन और बुज़ुर्गी, हर इक शय में नज़र आए  
है सब कुछ तेरी कारीगरी, क्यों न तेरी हम सना गाएँ  
तू है मालिक मेरा, मैं हूँ तेरा मुक़ाम  
अपनी मण्डली में आ...

बलहीनों का तू बल है ख़ुदाया, लंगड़ों को तू ही चलाता है  
अंधों को करता बीनाई अता तू , मुर्दे क़ब्र से उठाता है  
तू है मेरा तबीब2, तू उम्मीद-ए-शिफ़ा  
अपनी मण्डली में आ....
  1. पेन्तेकोस्त: पिन्तेकुसत ↩︎
  2. तबीब: हकीम, ज्ञानी, डॉक्टर ↩︎