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तू जो छू जाए

तू जो छू जाए इस मट्टी को ये मट्टी1 कुंदन2 हो जाए 
कुम्हार बने जिस बर्तन का वो बर्तन दर्पण हो जाए
येसू , येसू

तूफ़ानों की हस्ती है क्या
जब ज़िंदा चट्टान पे हों आँखें
अंगूर के पेड़ से पैवस्ता हर डाली सावन हो जाए

तेरे लख़्त-ए-जिगर3 ने पाक ख़ुदा
बख़्त-ए-इन्सान4 बदल डाला
ईमान जो लाए येसू पर अंबर की धड़कन हो जाए

दुन्या छोड़े, छोड़े साथी मट्टी का खिलौना है इन्सान
गर हाथ में हाथ हो येसू का
तो मौत भी जीवन हो जाए
  1. मट्टी: मिट्टी ↩︎
  2. कुंदन: शुद्ध सोना ↩︎
  3. लख़्त-ए-जिगर: हृदय का हिस्सा; प्रिय पुत्र ↩︎
  4. बख़्त-ए-इन्सान: भाग्य, क़िस्मत ↩︎