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रूह-ए-पाक हम पे आ
रूह-ए-पाक हम पे आ, आ ठहर जा बदलूँ मैं, तड़पूँ मैं जीऊँ येसू के लिये... जीवन बदले, सूरत बदले बदले तन और मन रूह-ए-पाक जीना सिखा, आ ठहर जा बदलूँ मैं, तड़पूँ मैं जीऊँ येसू के लिये... लफ़्ज़ नए और साज़ नए हों बदले सुर संगीत रूह-ए-पाक छू ये गला, आ ठहर जा बदलूँ मैं, तड़पूँ मैं जीऊँ येसू के लिये... दूल्हे दुल्हन का वो रिश्ता गहरी गहरी प्रीत रूह-ए-पाक मुझे जिला, आ ठहर जा बदलूँ मैं, तड़पूँ मैं जीऊँ येसू के लिये...