Original scale: D#mCurrent scale: D#m
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पाक रूह की आग के शोले

पाक रूह की आग के शोले भेज आसमान खोल कर 
मेरा इनाम पाक रूह भेज आसमान खोल कर

जिस में मसीहा का रूह नहीं
येसू की दुल्हन में शामिल नहीं
मुझ में तू अपना ज़ोर भर भेज आसमान खोल कर

रूह-ए-पाक मेरा असासा1 है दुखों में देता दिलासा2 है
क़ुव्वत से मामूर कर भेज आसमान खोल कर

रूह-ए-पाक तेरा इन्तेज़ार है तेरे लिए दिल बेक़रार है
मेरी ज़रूरत पूरी कर भेज आसमान खोल कर

मुझे आस है रूह-ए-पाक की
मुझे प्यास है रूह-ए-पाक की
मेरी ज़रूरत पूरी कर भेज आसमान खोल कर
  1. असासा: माल, दौलत, संपति ↩︎
  2. दिलासा: तसल्ली, हौसला, आराम ↩︎