Original scale: A#mCurrent scale: A#m
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नासरी के सिवा

नासरी के सिवा मैं तो कुछ भी नहीं 
होके उस से जुदा मैं तो कुछ भी नहीं

उसकी राहों पे चलता रहूँ उम्रभर
बीत जाए योंही ज़िंदगी का सफ़र
फ़ज़्ल1 कर तू अता मैं तो कुछ भी नहीं
होके उस से जुदा मैं तो कुछ भी नहीं

ख़ाक2 हूँ ख़ाक में लौटना है मुझे
ये बदन का वतन छोड़ना है मुझे
वो ठिकाना मेरा मैं तो कुछ भी नहीं
होके उस से जुदा मैं तो कुछ भी नहीं

उसका रस्ता अगरचे3 बड़ा तंग है
हर क़दम पे मगर वो मेरे संग है
वो मेरा रहनुमा मैं तो कुछ भी नहीं
होके उस से जुदा मैं तो कुछ भी नहीं



  1. फ़ज़्ल : अनुग्रह, कृपा ↩︎
  2. ख़ाक : मिट्टी, भूमि ↩︎
  3. अगरचे (या अगरचि) : अगर ↩︎