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ऐ लश्करों के रब्ब

ऐ लश्करों के रब्ब ऐ अहद के सन्दूक़ 
तू हज़ारों हज़ार में लौट के आ लौट के आ

तुझसे कीना रखनेवाले परागन्दा हों
तेरे सारे दुश्मन शर्मिन्दा हों वह शर्मिन्दा हों

दुश्मनों के रथों को तू मार भगाता है
अपनी बादशाही का झंडा लहराता है झंडा लहराता है

यरीहो की दीवारें सारी गिरती जाती हैं
सारी क़ौमें तेरे आगे झुकती जाती हैं वह झुकती जाती हैं

तेरे प्यार का चर्चा सुब्ह-ओ-शाम करते हैं
बंद दरवाज़े येसू नाम से खुलते जाते हैं वह खुलते जाते हैं