इन भाषाओं में देखिए:

मैं उत्थों मंगणा है

ना आस रक्खाँ दुनिया ते ना आसरा लैणा ए 
मैनूँ जो कुझ चाहीदा येसू कोलों लैणा ए

मैं ओत्थों मंगणा ए जित्थों राजे वी मंगदे ने
ओहदे कोलों मंगण तों कंगाल ना संगदे ने
ओह देवे ना देवे ओहदी रिज़ा1 च रहणा ए
मैनूँ जो कुझ चाहीदा…

ओह मेरा शाफ़ी ए ओहदा फ़ज़ल2 ही काफ़ी ए
धो दित्ते पाप मेरे मैनूँ बख़्शी माफ़ी ए
हर वेले नाल रवे मैं होर की लैणा ए
मैनूँ जो कुझ चाहीदा…

ओह मेरा अयाली ए ओहदी क़बर वी ख़ाली ए
ओह मंबा3 ज़िंदगी दा ओहदी शान निराली ए
ओहदे क़दमाँ च ज़िंदगी ए मैं ओत्थे ही रहणा ए
मैनूँ जो कुझ चाहीदा…
  1. रिज़ा : संतुष्टि, स्वीकृता, इच्छा, प्रसन्नता ↩︎
  2. फ़ज़्ल : अनुग्रह ↩︎
  3. मंबा : झरना, चश्मा, उत्स ↩︎