तेरे रूह से

तेरे रूह से तेरे रूह से तेरे रूह से ख़ुदावंद ख़ुदा 
ये पहाड़ भी मैदान हो जाएगा
सहरा में भी एक राह बन जाएगा

एक काम नया टू करेगा बियाबान में डर्या बहेगा
हर दरवाज़ा जेवी बंद खुल जाएगा
सहरा में भी एक राह बन जाएगा

तेज़ आँधी का जैसे सन्नाटा बरसे बादल यूँ तेरी वफ़ा का
आसमान ज़मीन पे उतर आएगा
सहरा में भी एक राह बन जाएगा

हमपे तेरा फ़ज़्ल क़ीमती है कुछ नहीं है जो मुमकिन नहीं है
क़ुल्ज़म भी सामने से हट जाएगा
सहरा में भी एक राह बन जाएगा