तेरे दिल के दर पर

तेरे दिल के दर पर येशु खटखटाता 
खोल दे तू दरवाज़ा वो है आना चाहता

बनना चाहता वो है, हाँ हाँ तेरा ही मेहमान आज
तेरा ग़म-ओ-फ़िक्र वो है उठाना चाहता

ख़ुशी अपनी देता, हाँ हाँ तुझको है मसीहा
रात दिन तेरे साथ ही वो है रहना चाहता

नर्म आवाज़ से बोलता, हाँ हाँ मुआ वास्ते तेरे
छोड़ दे बद-सुलूकी खोल दे दर मैं आता

तेरी ख़ातिर मैं ने, हाँ हाँ पहना ताज कँटीला
तुझको अब जलाली ताज हूँ मैं पहनाता

बेवफ़ा न हो तू, हाँ हाँ मेरे ख़ून ख़रीदे
कर मेरा इक़रार तू मुझ से क्यों शर्माता

खोलता हूँ दरवाज़ा, हाँ हाँ दिल का ऐ मसीहा
आ और इस में रह तू मैं हूँ दिल से चाहता

येशु प्यारो कहता, हाँ हाँ क़ीमती वक़्त है जाता
वक्त गया जो प्यारो वापस फिर नहीं आता